Lucknow: पिता-पुत्र ने बनाई फर्जी कम्पनी, ठगे लोगों के करोड़ो रूपये

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Lucknow : लखनऊ (Lucknow) के विकास नगर पुलिस ने शातिर बाप-बेटे को पकड़ा। बाप-बेटे ने मिलकर ट्रिनिटी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के नाम से कंपनी बनाकर करीब सात हजार लोगों से करोड़ों की ठगी की। इन दोनों बाप बेटे के ऊपर अब तक 29 केस दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने इन दोनों बाप बेटों के ऊपर करीब 25-25 हजार रुपए की इनाम की घोषणा की थी। लेकिन अभी भी दो जन पुलिस के गिरफ्त से दूर है।

लखनऊ (Lucknow) के एडीसीपी उत्तरी अनिल कुमार यादव का कहना है कि राकेश शर्मा और उनके बेटे अरुण कुमार शर्मा को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। ये दोनों मिलकर रामकेश चिटफंड कंपनी ट्रिनिटी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी का चलाते है। जिसमे बाप एमडी है तो बेटा अरुण उसमें निदेशक है।

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Lucknow : पांच और अन्य राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था

लखनऊ (Lucknow) के गुडंबा के सीमांतनगर कल्याणपुर के रहने वाले पिता और पुत्र ने उत्तर प्रदेश समेत पांच और अन्य राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। एसीपी महानगर जया शांडिल्य का कहना है कि पिता-पुत्र ने टेढ़ी पुलिया रिंग रोड यूनाइटेड भवन रायल स्क्वॉयर में सोसायटी ऑफिस खोल रखा था। यह लोगों को आरडी, एफडी, मासिक जमा योजना, दैनिक जमा योजना, सुकन्या जमा योजना और कंपनी में निवेश में मोटा प्रॉफिट दिलाने के बहाने ठगी किया करते थे। लखनऊ (Lucknow) के पास के कई प्रदेशों में इन लोगों ने अपनी अलग-अलग ब्रांच खोल रखी थी। जहां पर बैंकिंग संबंधित कई कार्य किए जाते हैं।

पुलिस का कहना है कि इनके दफ्तरों में कई अहम दस्तावेज पाए गए हैं। जिसकी जांच अभी शुरू है। दूसरी और पुलिस इन दोनों की संपत्ति का भी निरीक्षण कर रही है। पुलिस छानबीन कर पता कर रही है कि इस कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी और एजेंट कहां कहां है? पुलिस का कहना है कि दिल्ली के कारोबारी से यह कंपनी खरीदी गई थी। प्रभारी निरीक्षक तेज बहादुर सिंह के हिसाब से राकेश शर्मा से पूछने पर पता चला कि उसने ट्रिनिटी मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी को दिल्ली के एक कारोबारी से सात साल पहले 2015 में खरीदा था।

Lucknow : 18% ब्याज पर लोगों को लोन दिया करती थी

उसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के अन्य राज्यों में भी अपना कार्यालय शुरू कर दिया। कंपनी 18% ब्याज पर लोगों को लोन दिया करती थी। और तो और वही एफबी आईडी पर 10% सालाना ब्याज भी दिया जाता था। आरोपी ने बताया कि कम से कम ₹100 की धनराशि से यहां पर खाता खोला जाता था। आरोपी का कहना है कि ये लोग ज्यादा से ज्यादा धनराशि जमा कराने वालों को 3 साल में दुगना मुनाफा देने का वादा दिया जाता था।

एडीसीपी उत्तरी के मुताबिक राकेश शर्मा पहले एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करते थे। वहां से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपना खुद का बिजनेस शुरू कर दिया। साल 2002 में राकेश शर्मा ने कृषि नगर के सेक्टर मैनेजर के पद पर तैनात होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने खुद की कंपनी खोलने के लिए उत्तर प्रदेश रहना शुरू कर दिया।

लखनऊ (Lucknow) आने के बाद राकेश शर्मा ने संतोष अग्रहरि और अभिषेक पांडे के साथ मिलकर चिटफंड कंपनी खोलने का प्लान बनाया और फिर दिल्ली के किसी व्यापारी से यह कंपनी खरीद ली। उन्होंने बताया कि इन्होंने कई राज्यों में अपना नेटवर्क भी फैला लिया था। पुलिस कंपनी के दो डायरेक्टर संतोष और अभिषेक को अभी तलाश कर रही है।

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